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10-Percent Reservation for Economically Backward 2021 : आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण क्या है

10-Percent Reservation for Economically Backward 2021 : आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण क्या है

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आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण क्या है

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्तियों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला 124वाँ संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा द्वारा 8 जनवरी को पारित कर दिया गया। आरक्षण का लाभ हिंदू, मुसलमान और ईसाई समुदाय के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के साथ-साथ सभी अनारक्षित जातियों के गरीबों को मिलेगा। यह नया आरक्षण SC, ST और OBC के आरक्षण को प्रभावित नहीं करेगा।

फिलहाल 49.5 प्रतिशत सरकारी नौकरियाँ अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ी जातियों के लिये आरक्षित हैं।
जिसमें भारत की कुल जनसंख्या के 20 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुसूचित जातियों के लिये 15%, कुल जनसंख्या के 9% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुसूचित जनजातियों के लिये 7.5% तथा अन्य पिछड़ी जातियों के लिये 27% आरक्षण का प्रावधान है।

सरकार के नए कदम से आरक्षण का कोटा 49.5 प्रतिशत से 59.5 प्रतिशत हो जाएगा। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में इंदिरा साहनी फैसले में साफ किया था कि किसी भी विशेष श्रेणी में दिये जाने वाले आरक्षण का कुल आँकड़ा 50% से अधिक नहीं होना चाहिये।

आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण उद्देश्य :-

1.)सरकार ने अनारक्षित वर्ग के नागरिकों को आरक्षण देने का फैसला सिन्हो आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया है।
2.)सेवानिवृत्त मेजर जनरल एस.आर. सिन्हो की अध्यक्षता में 2006 में एक आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने 22 जुलाई, 2010 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
3.)रिपोर्ट में सामान्य जातियों के गरीब लोगों को भी सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने की सिफारिश की गई थी। हालाँकि इस सिफारिश को तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
4.)पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसी तरह के आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन इंद्रा साहनी (1992) मामले में नौ न्यायाधीशों वाली पीठ ने इसे खारिज कर दिया था।

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प्रस्तावित आरक्षण के लिये पात्रता :-

1.)सामान्य वर्ग के ऐसे परिवार जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए या उससे कम हो।
2.)जिनके पास 5 एकड़ या उससे कम कृषि योग्य भूमि है।
3.)ऐसे परिवार जिनके पास 1000 वर्ग फीट या उससे कम क्षेत्रफल का फ्लैट है।
4.)अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में जिनके पास 109 गज का प्लाट है।
5.)गैर-अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में 209 गज या उससे कम का प्लाट है।
6.)जो लोग अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे।

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सामाजिक वास्तविकता तथा संवैधानिक प्रावधान :-

1.)सामाजिक रूप से उन्नत जातियों (Socially Advanced Castes-SACs) में भी SC, ST तथा OBC की तरह गरीब लोग हैं और उन्हें भी मदद की ज़रूरत है।

2.)लेकिन मुद्दा यह है कि वे किस विशिष्ट समस्या का सामना कर रहे हैं, और इसके लिये उपयुक्त संवैधानिक रूप से स्थायी समाधान क्या है।
भारतीय संविधान में समानता का सिद्धांत (Principle of Equality) है। अनुच्छेद 15 (1) के अनुसार राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या इनमें से किसी आधार पर विभेद नहीं करेगा।

3.)अनुच्छेद 16 (1) के अनुसार, राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिये अवसर की समता होगी।

4.)अनुच्छेद 15 (4) में विशेष प्रावधान किया गया है राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिये कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगा।

5.)अनुच्छेद 16 (4) के अनुसार, राज्य को पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिये उपबंध करने से निवारित नहीं करेगा।

6.)आरक्षण का प्रावधान करने वाले अनुच्छेद 16 (1) व 16 (4) अपवाद नहीं हैं बल्कि एक पहलू है। ऐसे में अनुच्छेद 16 (4) OBC के अलावा अन्य वर्गों को नौकरी में बराबरी का मौका देने का अधिकार नहीं छीनता। “पिछड़े हुए नागरिकों” शब्द को आमतौर पर SCs, STs और SEdBCs (Socially and Educationally Backward Castes) को शामिल करने के लिये मंडल मामले (इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ, 1992) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा परिभाषित किया गया है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केवल आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण अर्थात् जो ऐतिहासिक भेदभाव (Historical Descrimination) के सबूत के बिना है, का संविधान में कोई औचित्य नहीं है। इंद्रा साहनी मामले में नौ न्यायाधीशों वाली पीठ ने फैसला सुनाया था कि आरक्षण ऐतिहासिक भेदभाव और इसके निरंतर दुष्प्रभावों के लिये एक उपाय है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक उत्थान (Economic Uplift) या गरीबी उन्मूलन नहीं है। सामाजिक पिछड़ेपन के कारण ही आर्थिक पिछड़ापन है।

10 Percent Reservation for Economically Backward 2021 (क्रियान्वयन होगी बड़ी चुनौती ) :-

सरकार के सामने 10 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन की बड़ी चुनौती होगी। देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या SC, ST तथा OBC समुदाय से आती है जिन्हें 49.5 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जबकि 30 प्रतिशत जनसंख्या के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण को किस प्रकार लागू किया जाएगा।

उदाहरण के लिये आरक्षण की पात्रता के लिये वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम होने की बात कही गई है। आर्थिक स्थिति की बात की जाए तो देश में 8 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों की संख्या काफी अधिक है क्या उनके लिये 10 प्रतिशत आरक्षण पर्याप्त होगा?

मुद्दा यह भी है कि इतने बड़े आरक्षित वर्ग के लिये क्या हमारे पास पर्याप्त नौकरियाँ मौजूद हैं?

ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका परीक्षण इसे लागू किये जाने से पूर्व किया जाना आवश्यक है, साथ ही इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिये।

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