Indian Festival

Akshaya Tritiya – अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है

Akshaya Tritiya

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है , अक्षय तृतीया २०२० की समयावधि और शुभ मुहूर्त , पूजा करने का शुभ मुहूर्त , सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त , अक्षय तृतीया से जुड़ी कुछ खास पौराणिक घटनाएं  , Akshaya Tritiya

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है:- हिन्दू इस दिन को इसलिए मनाते हैं क्योंकि उनके अनुसारअक्षय तृतीया’ उस दिन है जब ज्ञान के महान देवता गणेश जी नेमहाभारतनामक ग्रंथ की रचना की थी। अक्षय तृतीया को वर्ष का सबसे सुनहरा दिन माना जाता है क्योंकि अक्षय शब्द का अर्थ है वहशाश्वतजो कभी कम नहीं होता।

अक्षय तृतीया २०२1की समयावधि और शुभ मुहूर्त

2021 में इसे 26 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा और इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र के साथ मिलकर इसे भी अधिक शुभ माना जाएगा।इस दिन की शुभ कामना लोगों को नए उद्यम शुरू करने, अचल संपत्ति या सोने, और शादी जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में निवेश करने की सलाह देती है।इस दिन को बहुत अच्छी किस्मत और समृद्धि लाने के लिए कहा जाता है।

भारत में पहला 5G स्मार्टफोन कब हुआ लॉन्च जानिए इसके बारे में। 

पूजा करने का शुभ मुहूर्त – सुबह के 05-45 AM से लेकर दोपहर 12-19 PM तक यानी कि कुल 06 घंटा 34 मिनट।

सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त- 25 अप्रैल सुबह 11-51 से लेकर अगले दिन 26 अप्रैल दोपहर 01-22 तक।

अक्षय तृतीया महत्व:- इस दिन सोने और चांदी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।लक्ष्मी सोने-चांदी का प्रतीक है और ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई सोने और चांदी पर इस दिन निवेश करे तो लक्ष्मी समृद्धि और धन से लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करेगी।इस दिन शुरू किया गया कोई भी व्यवसाय पनपने के लिए बाध्य है।अक्षा त्रिटिया पर गृह प्रथा प्रदर्शन करने के लिए कोई मुरुतम की आवश्यकता नहीं हैरक्तदाताओं को इस दिन एननादान से बहुत लाभ मिलता है।गाय का दूध पिलाना उसके पापों और दोषों को दूर करेगा।व्रत, धार्मिक तथा आध्यात्मिक क्रियाकलाप, दान, जप अक्ष तृतीया पर पवित्र माना जाता है।भगवान लक्ष्मी और विष्णु की पूजा करने से हमें परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होगा।आइए, हम इस शुभ पर्व को बड़ी उमंग से मनाते हैं और भरपूर धन, समृद्धि और प्रसन्नता प्राप्त करते हैं।

खांसी केसे होती है :- लक्ष्ण , उपाय , इलाज

अक्षय तृतीया से जुड़ी कुछ खास पौराणिक घटनाएं

  • यह भगवान विष्णु के दस दशवनाओं में से एक भगवान परशुराम का जन्मदिन है।
  • 3 सत्ययुग के बाद व्रत युग का आरम्भ होता है।
  • जिस दिन सुदामा ने कृष्ण को चावल अर्पित किया था उसने उन्हें भरपूर धन और प्रसन्नता से आशीर्वाद दिया।
  • पाण्डवों ने वनवास की दशा में द्रोपदी को अक्ष-पात्र में विलीन कर दिया ताकि उनके पास प्रचुर अन्न हो।
  • वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना प्रारम्भ की।
  • पवित्र गंगा धरती पर अवतरित हुई।
  • पुरी जगन्नाथ की वार्षिक रथ-यात्रा इसी दिन आरंभ होती है।
Get 90% OFF On All 1 Year Hosting Plan Buy Now
लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्सक्राइब करें Subscribe Now
अब आप  फॉलो को Google News App पर Follow Now
कैसा लगा हमारा ये आलेख, अगर आपको अच्छा लगे तो अपने दोस्तों के साथ इस पोस्ट को शेयर जरूर करें

Leave a Comment

You cannot copy content of this page