Chandrayaan 2 Mission |चंद्रयान-2 मिशन की खास बात | इसरो का छोटा सा कदम, भारत की छवि बनाने की लंबी छलांग | कितने दिन में चांद पर पहुंचेगा Chandrayaan 2

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चंद्रयान-2 मिशन,चंद्रयान-2 मिशन क्या खास है,Chandrayaan 2 Mission ,भारत पहली बार चांद की सतह पर पहुंचेगा,चंद्रयान-2 के काम,कब तक चलेगा मिशन?,मिशन पर खर्च होंगे 603 करोड़ रुपए,चंद्रयान-2 मिशन की खास बात,,बाहुबली’ जीएसएलवी मार्क-।।। से होगी लॉन्चिंग,कितने दिन में चांद पर पहुंचेगा हिंदुस्तान.,Chandrayaan-2 के बारे में ये भी जानें

Chandrayaan-2 के बारे में ये भी जानें:-

कितने दिन में चांद पर पहुंचेगा Chandrayaan 2 :-भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दूसरा मून मिशन Chandrayaan-2 सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया गया. अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है. करीब 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू करेगा.

Chandrayaan-2 के बारे में ये भी जानें:- Chandrayaan-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा. 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा. 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा.

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‘बाहुबली’ जीएसएलवी मार्क-।।। से होगी लॉन्चिंग :-4 टन तक का भार (पेलोड) ले जाने की अपनी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ कहे जा रहे जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट ने जीसैट-29 और जीसैट-19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने इसी रॉकेट का इस्तेमाल करते हुए क्रू मॉड्यूल वायुमंडलीय पुन: प्रवेश परीक्षण (केयर) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इसरो के प्रमुख के सिवन के मुताबिक, अंतरिक्ष एजेंसी दिसंबर 2021 के लिए निर्धारित अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ के लिए भी जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट का ही प्रयोग करेगी।

चंद्रयान-2 मिशन :-भारत सोमवार को अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) अपने महत्‍वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को लॉन्‍च करने जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवन ने बताया कि भारत 15 जुलाई को तड़के 2:51 बजे अपने सबसे प्रतिष्ठित मिशन चन्द्रयान-2 को लॉन्च होने वाला था भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार तड़के होने वाले चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को तकनीकी खामी की वजह से टाल दिया काउंटडाउन खत्म होने से 56 मिनट 24 सेंकेड पहले ही इसमें कोई तकनीकी खामी नजर आई, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया. अब इसके लिए नई तारीख का ऐलान किया जाएगा. इसरो ने इस बात की जानकारी देते हुए ट्वीट किया, ‘प्रक्षेपण यान प्रणाली में टी-56 मिनट पर तकनीकी खामी दिखी. एहतियात के तौर पर चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज के लिए टाल दिया गया है. नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी. इस मिशन में भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV MK-3 का इस्तेमाल होगा।




चंद्रयान-2 मिशन की खास बात :-
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि चंद्रयान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। आज तक चंद्रमा के इस हिस्‍से में कोई भी स्‍पेस एजेंसी नहीं पहुंच सकी है। लॉन्चिंग के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 के लैंड करने में करीब 2 महीने का वक्त लगेगा। मिशन सफल रहा तो चंद्रयान-2 के 6 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने की संभावना है।

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15 जुलाई को लांच होना था भारत का मिशन चंद्रयान-2:-बुधवार को भारत के चंद्रयान-2 मिशन का ऐलान किया था, जो 15 जुलाई को लॉन्च होगा. इसरो चंद्रमा पर भेजे जाने वाले 3.8 टन वजन वाले अंतरिक्ष यान को अंतिम रूप दे रहा है|  लॉन्चिंग के कई हफ्तों बाद यह चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. यह वह हिस्सा है, जहां आज तक दुनिया का कोई अंतरिक्ष यान नहीं उतरा है|
दस साल में दूसरी बार भारत चांद पर मिशन भेज रहा है
इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर, मिशन के दौरान चांद का चक्कर लगाएगा और फिर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. चंद्रयान-1 2009 में भेजा गया था. हालांकि, उसमें रोवर शामिल नहीं था. चंद्रयान-1 में केवल एक ऑर्बिटर और इंपैक्टर था. इसरो ने इस चंद्रयान-2 मिशन की कई तस्वीरें जारी की है. इस वजह से इसके बारे में उत्सुकता और रोमांच काफी बढ़ गया है.

भारत पहली बार चांद की सतह पर पहुंचेगा:-चंद्रयान-2 मिशन इससे पहले हुए चंद्रयान मिशन-1 से कई मायनों में अलग है। इस बार खास बात यह है कि इस बार चंद्रयान चांद की सतह पर उतरेगा। 2008 में लॉन्च हुआ चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में गया जरूर था लेकिन वह चंद्रमा पर उतरा नहीं था। उसे चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में स्थापित किया गया था।




चंद्रयान-2 के काम:-चंद्रयान-2 मिशन के तहत चांद की सतह पर एक रोवर को उतारा जाएगा जो अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा। रोवर चांद की मिट्टी का विश्लेषण करेगा और उसमें मिनरल्स के साथ-साथ हिलियम-3 गैस की संभावना तलाशेगा, जो भविष्य में ऊर्जा का संभावित स्रोत हो सकता है।
क्‍या करेगा चंद्रयान
1.)चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर पानी के प्रसार और मात्रा का निर्धारण
2.)चंद्रमा के मौसम, खनिजों और उसकी सतह पर फैले रासायनिक तत्‍वों का अध्‍ययन
3.)चांद की सतह की मिट्टी के तत्वों का अध्ययन
4.)हिलियम-3 गैस की संभावना तलाशेगा जो भविष्य में ऊर्जा का बड़ा स्रोत हो सकता है

कब तक चलेगा मिशन?:-15 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद 6 सितंबर को चंद्रयान के चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है। वहां लैंडर और रोवर 14 दिनों तक ऐक्टिव रहेंगे। ऑर्बिटर 1 साल तक ऐक्टिव रहेगा और चांद की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा।

मिशन पर खर्च होंगे 603 करोड़ रुपए:-
चंद्रयान-2 को जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। 380 क्विंटल वजनी स्पेसक्राफ्ट में 3 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। ऑर्बिटर में 8, लैंडर में 3 और रोवर में 2 यानी कुल 13 पेलोड होंगे। पूरे चंद्रयान-2 मिशन में 603 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जीएसएलवी की कीमत 375 करोड़ रु. है।
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