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वायु‘ चक्रवात  क्या है : चक्रवात क्यों आता हैं, जानिए विस्तार से।

Cyclone Vayu

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वायु‘ चक्रवात  क्या है :-

‘वायु‘ गुजरात की तरफ कहर बरपाने बढ़ रहा है। इस बार इसका नाम भारत ने रखा है। भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के अनुसार अभी इसकी गति 80 से 90 किमी प्रति घंटा है, लेकिन गुजरात के तटीय इलाकों तक पहुंचते-पहुंचते यह 110 से 135 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेगा। 220 किमी/ घंटा: पिछले महीने ओडिशा में आए चक्रवात फणि की इस रफ्तार के मुकाबले ‘वायु’ कमजोर होगा।

अरब सागर के चक्रवात :-

जून में चक्रवात आना आम है। उनमें से बहुत कम ही अरब सागर में उत्पन्न होते हैं। ज्यादातर चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उठते हैं। पिछले 120 वर्षों में जो रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, सभी चक्रवाती तूफानों के लगभग 14 फीसद चक्रवात भारत के आस-पास अरब सागर में आए हैं। बंगाल की खाड़ी में उठने वालों की तुलना में अरब सागर के चक्रवात अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं।

क्या  होता है चक्रवात  :

कम वायुमंडलीय दाब के चारों ओर गर्म हवाओं की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं। दक्षिणी गोलाद्र्ध में इन गर्म हवाओं को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये घड़ी की सुई के चलने की दिशा में चलते हैं। जबकि उत्तरी गोलाद्र्ध में इन गर्म हवाओं को हरीकेन या टाइफून कहा जाता है। ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में घूमते है।

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क्यों आता है चक्रवात? :-

गर्म क्षेत्रों के समुद्र में सूर्य की भयंकर गर्मी से हवा गर्म होकर अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बना देती है। हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर आती है और ऊपर की नमी से संतृप्त होकर संघनन से बादलों का निर्माण करती हैं। रिक्त स्थान को भरने के लिए नम हवाएं तेजी के साथ नीचे जाकर ऊपर आती हैं। फलस्वरूप ये हवाएं बहुत ही तेजी के साथ उस क्षेत्र के चारों तरफ घूमकर घने बादलों और बिजली कड़कने के साथ-साथ मूसलधार बारिश करती हैं। कभी-कभी तो तेज घूमती इन हवाओं के क्षेत्र का व्यास हजारों किमी में होता हैं।

सेना की 10 टुकड़ियां तैनात :

रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए राज्य सरकार ने सेना की 10 कॉलम (टुकड़ी) को पश्चिमी तट पर तैनात किया है। जामनगर, गिर, द्वारका, पोरबंदर, सोमनाथ, मोरबी, भावनगर, राजकोट और अमरेली में सेना को लगाया गया है। सेना की सभी टुकड़ियों को बुधवार दोपहर 12 बजे तक सभी जिला मुख्यालयों पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए सेना की 24 टुकड़ियों को तैयार रहने को कहा गया है। एक कॉलम में सेना की इंफैंट्री, आर्टिलरी, सिग्नल, इंजिनियर्स और मेडिकल कॉर्प्स के जवान होते हैं।

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