दीपावली कब क्यों कैसे मनाई जाती है|

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दीपावली का इतिहास,दीपावली मनाने का कारण,दीवाली की प्रार्थनाएं,दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है दीपावली कब क्यों कैसे मनाई जाती है|

 

भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ साथ त्योहारों को भी विशेष महत्व दिया जाता है जिस प्रकार ऋतू परिवर्तन होती है और खेतों में नयी फसल पक जाती है उसी प्रकार मानव अपनी खुशी को त्योहारों और उतसवो के रूप में प्रकट करता है दीपावली का त्यौहार हिंदुओ का  प्रमुख त्यौहार है यह त्यौहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि में अपना विशेष महत्व रखता है। दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ अर्थात ‘दिया’ व ‘आवली’ अर्थात ‘लाइन’ या ‘श्रृंखला’ के मिश्रण से हुई है। इसके उत्सव में घरों के द्वारों, घरों व मंदिरों पर लाखों प्रकाशकों को प्रज्वलित किया जाता है। दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं उसे अन्य भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकार जाता है|

जैसे :-‘दीपावली’ (उड़िया), दीपाबॉली'(बंगाली), ‘दीपावली’ (असमी, कन्नड़, मलयालम:ദീപാവലി, तमिल:தீபாவளி और तेलुगू), ‘दिवाली’ (गुजराती:દિવાળી, हिन्दी, दिवाली, मराठी:दिवाळी, कोंकणी:दिवाळी,पंजाबी), ‘दियारी’ (सिंधी:दियारी‎), और ‘तिहार’ (नेपाली) मारवाड़ी में दियाळी.|

दीपावली का इतिहास:भारत में प्राचीन काल से दीवाली को हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह में गर्मी की फसल के बाद के एक त्योहार के रूप में दर्शाया गया। दीवाली का पद्म पुराण और स्कन्द पुराण नामक संस्कृत ग्रंथों में उल्लेख मिलता है जो माना जाता है कि पहली सहस्त्राब्दी के दूसरे भाग में किन्हीं केंद्रीय पाठ को विस्तृत कर लिखे गए थे। दीये (दीपक) को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है, सूर्य जो जीवन के लिए प्रकाश और ऊर्जा का लौकिक दाता है और जो हिन्दू कैलंडर अनुसार कार्तिक माह में अपनी स्तिथि बदलता है। कुछ क्षेत्रों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं। नचिकेता की कथा जो सही बनाम गलत, ज्ञान बनाम अज्ञान, सच्चा धन बनाम क्षणिक धन आदि के बारे में बताती है; पहली सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व उपनिषद में दर्ज़ की गयी है।7 वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव: कहा है जिसमें दिये जलाये जाते थे और नव दुल्हन और दूल्हे को तोहफे दिए जाते थे। 9 वीं शताब्दी में राजशेखर ने काव्यमीमांसा में इसे दीपमालिका कहा है जिसमें घरों की पुताई की जाती थी और तेल के दीयों से रात में घरों, सड़कों और बाजारों सजाया जाता था। फारसी यात्री और इतिहासकार अल बेरुनी, ने भारत पर अपने 11 वीं सदी के संस्मरण में, दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार कहा है।

दीपावली मनाने का कारण :-यह तो हम सभी जानते है की दिवाली क्यों मनाई जाती है क्योकि इस दिन भगवान राम ने दुष्ट असुर रावण का अंत क्या था लंका से विजय प्राप्त करके और चौदह साल का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे तो उनके आने की खुशी में हर घर घर में दीपक जलाये गये थे उसी पुण्य दिवस की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है

इसके साथ ही इस त्यौहार को मनाने के पीछे अन्य कारण भी माना जाता है क नरकासुर नामक राक्षस था जिसका भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से संहार किया था उसने 16 लड़कियों  को कैद क्र रखा था। लेकिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का संहार कर उन् लड़कियों को आजाद करवाया था इस उपलक्ष्य में दिवाली के एक दिन पहले नरक चतुदर्शी मनाई जाती है। इसी कारण दिवाली का त्योहर आज तक सभी  लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते है और खुशी सभी के साथ बाटते है जिस लोगो भाईचार की भावना बनी रहे।दीपावली कब क्यों कैसे मनाई जाती है|

दीवाली की प्रार्थनाएं:-

असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

असत्य से सत्य की ओर।
अंधकार से प्रकाश की ओर।
मृत्यु से अमरता की ओर।(हमें ले जाओ)
ॐ शांति शांति शांति।।

दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है:-बहुत ऐसे त्यौहार है जो एक दिन में मनाया जाता हैं लेकिन दीपावली एक दिन का पर्व नहीं अपितु पर्वों का समूह है| दीपावली का त्यौहार 5 दिनों तक मनाया जाता है। यह धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होता है। लेकिन दीपावली की तैयारी कई दिनों पहले से शुरू हो जाती है। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई करते है। घरो और अपनी दुकानों आदि की रंगाई-पुताई करते है। बाज़ारों की गलियों को सुनहरी झंडियों आदि से सजाया जाता है। इस तरह दीपावली से पहले ही घर, मोहल्ले, बाजार आदि सब साफ सजे हुए दिखाई देते है।

1.)पहला दिन (धनतेरस/ धनतृयोदशी):-धनतेरस का अर्थ है धन+तेरस = धन का अर्थ संपति और तेरस का अर्थ 13वां दिन। अर्थात चन्द्र मास के 2 छमाही के 16वें दिन घर के लिए धन आना। इस शुभ दिन पर लोग सोना-चाँदी, बर्तन आदि खरीदकर घर पर लाते है। यह दिन भगवान धनवंतरी की जयंती के उपलक्ष्य मे मनाया जाता है, जिनकी उत्पति समुद्र मंथन के दौरान हुई।

2.)दूसरा दिन (नरक चतुर्दशी):-नरक चतुर्दशी 14वें दिन आती है। जब भगवान कृष्ण ने नरकासूर का वध कर बुराई की सत्य की जीत पर जश्न मनाया जाता है। इस दिन लोग सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके नए कपड़े पहनते है और अपने घरो मे और आसपास दीपक जलाते है और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते है और पूजा करने के बाद पटाखे जलाते है।

3.)तीसरा दिन (अमावस):-इस मुख्य दिन पर लोग नए कपड़े पहनकर माता लक्ष्मी जी, सरस्वती जी और गणेशजी की पूजा की जाती है। लोग देवी देवता की आराधना कर माता लक्ष्मी से सदा घर मे रहने का निवेदन करते है। इस महान पूजा के बाद घरों और सड़कों पर दीपक और पटाखे जलाए जाते है। इस त्यौहार का महत्वपूर्ण दिन भी यही है।

4.)चौथा दिन (गोवर्धन पूजा/शुक्ल प्रतिपदा):-भगवान कृष्ण द्वारा इन्द्र के गर्व को पराजित करके लगातार बारिश और बाढ़ से बहुत से लोगो और मवेशियों के जीवन की रक्षा करने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अँगुली पर उठा लिया था। इसलिए इस दिन लोग अपने गाय-बैलों को सजाते है और गोबर को पर्वत बनाकर पूजा करते है और पटाखे चलाते है। लोग इस दिन अपने रिश्तेदारों से मिलने जाते है।

5.)पाँचवाँ दिन (भाई दूज):-इस दिन त्यौहार भाइयों और बहनों का है। इस दिन यम देवता अपनी बहन यामी से मिलने गए और वहाँ अपनी बहन द्वारा उनका आरती के साथ स्वागत हुआ और यम देवता ने अपनी बहन को उपहार दिया। इस तरह बहन अपने भाइयों की आरती करती है और फिर भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करता है।
इस तरह दीपावली का त्यौहार पाँचों दिन हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है।

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