होलिका दहन और पूजन का शुभ मुहूर्त, जानें किस समय होलिका की पूजा शुभ

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होलिका दहन पूजा-विधि :- यह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।होली रंगों का त्योहार है। इसलिए यह आनन्द और उमंग का त्योहार है। होली का त्योहार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है इस त्यौहार को मनाने के संबंध में दो बातें कही जा सकती हैं पहली तो यह कि इस त्योहार पर फसल पकने को तैयार होती है। हिंदू की लोक मान्यता है कि देवता को भोग लगाएं बिना कोई वस्तु उपयोग में नहीं यह जानी चाहिए इसलिए नयन की आहुति अग्नि में डालते हैं इसी परंपरा में होली का त्यौहार मनाते हैं। दूसरी बात यह है कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा हुआ करता था। वे दुष्ट था और अपने आप को ही भगवान मानता था उसका पुत्र पहलाद ईश्वर मैं विश्वास करता था हमेशा ईश्वर की भक्ति में लीन जाता था कई बार पहलाद पर अत्याचार किया जाएगी उसके पिता ही भगवान है लेकिन वह नहीं माने। अंत में उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि तुम प्रहलाद को अग्नि में लेकर बैठ जाओ होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। होली का पहलाद को अग्नि में लेकर बैठ गई लेकिन प्रहलाद ने जलकर होली का अग्नि में भस्म हो गई तब से लेकर यह त्यौहार आज तक मनाया जाता है।

होलिका दहन पूजा-विधि:-
1.) सबसे पहले होलिका पूजन के लिए पूर्व या उत्तर की ओर अपना मुख करके बैठें
2.) अब अपने आस-पास पानी की बूंदे छिड़कें
3.) गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाएं
4.) थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा पानी रखें
5.) नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए प्रतिमाओं पर रोली, मौली, चावल, बताशे और फूल अर्पित करें
6.) अब सभी सामान लेकर होलिका दहन वाले स्थान पर ले जाएं
7.) अग्नि जलाने से पहले अपना नाम, पिता का नाम और गोत्र का नाम लेते हुए अक्षत (चावल) में उठाएं और भगवान गणेश का स्मरण कर होलिका पर अक्षत अर्पण करें.
8.) इसके बाद प्रहलाद का नाम लें और फूल चढ़ाएं
9.) भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए पांचों अनाज चढ़ाएं
10.) अब दोनों हाथ जोड़कर अक्षत, हल्दी और फूल चढ़ाएं
11.) कच्चा सूत हाथ में लेकर होलिका पर लपेटते हुए परिक्रमा करें
12.) गोबर के बिड़कले को होली में डालें
13.) आखिर में गुलाल डालकर लोटे से जल चढ़ाएं.

होलिका दहन का मुहूर्त:- (Holika Dahan 2021 Shubh Muhurat)

  • होलिका दहन रविवार, मार्च 28, 2021 को
  • होलिका दहन मुहूर्त – 06:37 pm से 08:56 pm
  • अवधि – 02 घण्टे 20 मिनट्स
  • भद्रा पूँछ – 10:13 am से 11:16 am
  • भद्रा मुख – 11:16 am से 01:00 pm
  • होलिका दहन प्रदोष के दौरान उदय व्यापिनी पूर्णिमा के साथ
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2021 को 03:27 am
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 29, 2021 को 12:17 am
  • Also Read : होली 2021 :- इतिहास, महत्व, होली त्यौहार कब और क्यों मनाते हैं

होली के त्योहार की अच्छाई और बुराई:- इस त्यौहार की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि लोग इस अवसर पर पुराने गिले-शिकवे भूल कर आपस में गले मिलते हैं प्रेम व्यवहार को आपस मैं बढ़ाते हैं बुराई की दृष्टि से कुछ लोग इस अवसर पर नशे मैं चूर होकर एक दूसरे से लड़ाई झगड़ा करते हैं एक दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं। और गंदी गंदी गालियां देते हैं इन सभी में नशे का सहारा लेते हैं। होली के त्यौहार से हमें यह संकेत मिलता है कि होली मिलन और आनंद का त्योहार है इसलिए हमें इस त्योहार पर अभद्र प्रदर्शन नहीं करना चाहिए बल्कि एक दूसरे के गले मिलकर आपसी प्रेम व्यवहार बढ़ाना चाहिए हम सब को मिलकर इस संस्कृति को बनाए रखना है और इस संस्कृति को समझना चाहिए ज्यादा से ज्यादा भारतीय संस्कृति का विस्तार किया जाना चाहिए।।

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