Bimari

लू लगने के लक्षण, कारण, इलाज, दवा , बचाव एवं रोकथाम

लू लगने के लक्षण

ग्रीष्म ऋतु के आते  कुछ सामान्य  तरह की बीमारिया निश्चित रूप से व्यक्ति को अपने चपेट में ले लेती हैं। ऐसी स्थिति में हमारी सतर्कता की एकमात्र निदान है ।वैसे तो ग्रीष्म ऋतु में विशेष खूबिया है परंतु  साथ में  कुछ खामियां भी है ।जैसे कि गर्मी की ऋतु में तेज धूप से वातावरण गर्म हो जाता ग्रीष्म ऋतु में दिन के समय में घर से बाहर निकलते समय सूर्य की किरणों का प्रत्यक्ष रूप से हमारे शरीर प्रभाव पड़ता है  साधारण तौर पर हम इस  ‘लू  ‘  नाम से जानते है ।ऐसी स्थिति में व्यक्ति के शरीर का तापमान पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ जाता है। मानव शरीर में पानी एवं नमक की कमी हो जाती है ।शरीर में थर्मोस्टेट सिस्टम अचानक से शरीर के वातावरण में  ठंड प्रदान करने में नाकाम हो जाता है ।इस व्याधि को हम लू लगने  की संज्ञा देते हैं।इन सभी व्याधियों से बचने का एकमात्र उपाय है। सही खानपान अच्छी आदतें एवं अपनी दिनचर्या में व्यायाम को भी शामिल करें , Heat Stroke Symptoms in Hindi , Heat Stroke Causes & Risk Factors in Hindi , Loo, Heat Stroke, Symptoms, Causes, Treatment in Hindi , लू लगने के लक्षण

लू लगने के लक्षण कुछ इस प्रकार है:- 

1)जब रोगी के शरीर में नमक एवं पानी की कमी हो जाए तो समझ लीजिए आप लोग की चपेट में आ गए हैं

2 )ग्रीष्म ऋतु  में व्यक्ति को पसीना अधिक आता है ।पसीने के रूप में व्यक्ति के शरीर में संचित पानी और नमक पसीने के रूप में स्रावित होता रहता है ।जिससे व्यक्ति की नाड़ी की गति तेज हो जाती है।

3)व्यक्ति को लू लगने पर उसकी श्वास दर पहले की अपेक्षा कमी आती है। कुछ समय अंतराल बाद शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। व्यक्ति का तापमान बढ़ जाता है

4)लू लगने पर व्यक्ति की आंखों के साथ-साथ हाथ पैरों में भी जलन पैदा हो जाती है, जिससे कि व्यक्ति बेहोश हो जाने की शंका रहती  है।

5)ग्रीष्म ऋतु में तापमान बढ़ने से व्यक्ति के शरीर में जलन एवं बेचैनी बढ़ जाती है

6)लू लगने पर व्यक्ति का मुंह सूखना ,गला सूखना, एवं बार-बार प्यास लगती है ।यह सभी लू लगने के लक्षण है।

बहुत अधिक गर्मी पड़ने पर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है प्रायः देखा गया है ,कि या नसों में ब्लड जमा हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप नसे फट जाती है और व्यक्ति की आकस्मिक रूप से मृत्यु हो जाती है।

लू से बचने के लिए बचाव एवं रोकथाम:- 

1)लू से बचने के लिए व्यक्ति को गर्मी की ऋतु में सूती एवं हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। काले एवं गहरे  रंग के कपड़े को पहनने से बचें

2)सिर पर टोपी एवं किसी भी प्रकार की कपड़े को जैसे गमछा आदि को बाहर निकलते समय सिर पर रखें जिससे कि सूर्य की किरणों का सापेक्ष रूप से सिर पर प्रभाव ना पड़े ।यही नहीं आपको कानो एवं गालों को भी ढक कर चलना चाहिए।

3)छोटे बच्चों एवं वृद्ध व्यक्ति को घर के अंदर या छांव में ही रहना चाहिए ।सूर्य की  प्रत्यक्ष किरणें इनके लिए नुकसान दे साबित होती है।

4)शराब या अन्य प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन करने से बचें, क्योंकि इसका मस्तिष्क पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

5)धूप से बचने के लिए बाजार में तरह-तरह के क्रीम व लोशन मिलते हैं। जो कवच का काम करते हैं। बाहर जाने से पहले 15 मिनट पहले लगा ले ,फिर बाहर जाए।

6)यदि आपको बहुत अधिक प्यास लगे, मुंह सूखने लगे एवं घबराहट महसूस हो, ऐसी स्थिति में तुरंत सूर्य की किरणों से खुद का बचाव करें सर्वप्रथम छांव में आ जाए ,फिर थोड़ी देर बाद पानी पिए।

7)ग्रीष्म ऋतु में व्यक्ति को प्यास बहुत लगती है पानी पीने से क्षणिक रूप से प्यास शांत हो जाती है ऐसी स्थिति में व्यक्ति यदि छाछ का सेवन करें तो इससे व्यक्ति का शरीर शीतल हो जाता है ।साथ ही उसके प्यास लगने की समस्या का निदान हो जाता है

लू लगने पर व्यक्ति का इलाज किस प्रकार संभव है:- 

लू लगने की स्थिति में व्यक्ति को तरह-तरह के रोकथाम पहरेज़ के साथ -साथ  तत्काल रूप से इलाज की बेहद आवश्यकता होती है। इलाज के कुछ कारगर उपाय इस प्रकार हैं

1.) ठंडा पानी -लू की चपेट में आए रोगी को ठंडे पानी में पूर्ण रूप से जल में लिटाया जाता है ।ठंडे पानी या बर्फ के पानी से स्नान कराना काफी कारगर  सिद्ध होता है।

2.) वाष्पीकरण -इस प्रकार के इलाज  में व्यक्ति की त्वचा को ठंडे पानी के संपर्क में लाया जाता है ।मुख्य रूप से उनके ऊपर ठंडे पानी का छिड़काव किया जाता है। उसके उपरांत उसे गर्म हवा दी जाती है ।जिससे कि पानी वाष्प के रूप में उड़ जाए, यह तरीका भी काफी प्रभावी है।

3.) ठंडा कंबल एवं बर्फ का अनुप्रयोग –लू से पीड़ित व्यक्ति को ठंडे कंबल में लपेट दिया जाता है ।इसके साथ ही उसके शरीर के उन हिस्सों पर बर्फ प्रत्यारोपित की जाती है ।जहां शरीर की बड़ी नसे त्वचा की सतह के निकट हो ,जैसे कि पेट एवं जांघ के मध्य का भाग, बगल गर्दन एवं पीठ। इस प्रक्रिया यह स्पष्ट हो जाता है ,कि रक्त के संचार की गति तेज अथवा धीरे है।

4.) दवाई- लू लगने पर रोगी के तापमान यदि कोई विशेष परिवर्तन नहीं हो रहा हो,अर्थात सुधार नहीं हो रहा तो ऐसी स्थिति में बेंजोडायजेपाइन दवा ली जा सकती है। यह उपचार के दौरान शरीर में होने वाली कपकपी को रोकने में सहायक है

Get 90% OFF On All 1 Year Hosting Plan Buy Now
लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्सक्राइब करें Subscribe Now
अब आप  फॉलो को Google News App पर Follow Now
कैसा लगा हमारा ये आलेख, अगर आपको अच्छा लगे तो अपने दोस्तों के साथ इस पोस्ट को शेयर जरूर करें

Leave a Comment

You cannot copy content of this page