Navratri इंडियन फेस्टिवल

 नवरात्रा का तीसरा रूप :- चंद्रघंटा माता की पूजा-विधि

चंद्रघंटा माता की पूजा-विधि

नवरात्रा का तीसरा रूप :-माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति के रूप माँ चन्द्रघटा को स्थान दिया गया है। नवरात्रा तृतीय दिन चन्द्रघटा की पूजा की जाती है माता चन्द्रघटा की पूजा कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिया की जाती है।माता चंद्रघटा को चंद्रमा का प्रतीक कहा जाता है क्योंकि माताचंद्रघटा जिनके सिर पर आधा चन्द्र (चाँद)और बजती हुई घंटी है जो चाँद अतियंत सुंदर और आकर्षक है। माँ शेर पर बैठी संघर्ष के लिए हमेशा तैयार रहती है। माता चन्द्रघटा जिनके 3 आँखों और दस हाथों में हथियार पकड़े रहती है आँखो का रंग स्वंर्ण जैसा दिखाई देता है। और उन में अभूतपूर्व शक्ति की हिम्मत है और उनकी घंटी की आवाज इतनी भयानक है की बड़े बड़े को डरा देती है।

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। .प्रसाद तनुते महा चंद्रघण्टेति विश्रुता।

हमारा मन का प्रतीक है की अर्थात हमारा मन सभी प्रकार के नकारात्मक विचार आते रहते है जैसे ईष्या आती  है, घृणा आती है और आप उनसे छुटकारा नहीं पा सकते। आप कहीं भी भाग जाये , चाहे हिमालय पर भी क्यों न भाग जाये , आप का मन आपके साथ ही भागता रहेगा। जैसे ही हमारा मन में नकारात्मक भाव , विचार आते है तो हमारा मन उदास महसूस करता है तब हम विभिन तरीको से अपने मन को खुश कर ने की कोशिस करते है पर हमारा मन कुछ समय के लिए खुश रहता है पर कुछ समय बाद वहीं विचार हमारे मन में वापस आ जाते है और हम वहीं वापस पहुंच जाते है। अतः इन विचारों से पीछा छुड़ाने के लिए हम संघर्ष में फंस जाते है। “चंद्र”हमारी बदलती हुई भावनाओं व विचारों का प्रतीक है “ठीक वैसे ही जैसे चंद्रमा घटता व बढ़ता रहता है ” “घंटा” का अर्थ जैसे मंदिर के घण्टे – घड़ियाल “घंटी “आप मंदिर की घण्टे – घड़ियाल को किसी भी प्रकार बजाए , हमेशा उसमे से एक ही ध्वनि आती है।  इसी प्रकार एक अस्त – व्यस्त मन जो कई प्रकार के भावो से गिरा व उलझा रहता है तब भगवान के प्रति समर्पित हो जाते है तब दैवीय शक्ति का उदय होता है और यही से माता चन्द्रघटा देवी की शुरुआत होती है और इसके बाद से ही नवरात्रा के तीसरे दिन माँ  चन्द्रघटा की पूजा की जाती है

चंद्रघंटा माता की पूजा-विधि :- माता चन्द्रघटा की पूजा करने के लिए सबसे पहले लाल रंग के फूल चढ़ाए , लाल सेब ऊपर गुड़ चढ़ाए , घंटा बजाकर पूजा करें , ढोल और नगाड़े बजाकर पूजा आरती शुरू करें शत्रुओ की हार होगी , इस दिन गाय के दूध का प्रसाद बनाकर चढ़ाने से विशेस विधान है इससे हर दुखों से मुक्ति मिलती है।

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